वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी 1

  श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी

सत्यलोक!

यह ब्रह्मा (चतुर्मुख भगवान्) का निवास –  चारों ओर देवी सरस्वती कि कृपा से भरा हुवा!

एक तरफ दिव्य अप्सरायें नृत्य कर रहे थे I प्रतिभासंपन्न गायक हर जगह गा रहे थे I

ब्रह्मा और उनकी पत्नी सरस्वती श्वेत कमल पर विराजे हुए थे I

ब्रह्मा – चतुर्मुख रूप से प्रसिद्ध भगवान्! वेद और वेदान्त उन्हें  हिरण्यगर्भ से उल्लेख करते हैं I अपने जन्म स्थान के लिए प्रसिद्ध – श्रीमान नारायण की नाभि, वेद इनको विरासत में मिले – यह अलिखित (किसी से भी) सम्पत्ति I

उनकी अमित  ज्ञान के लिए उनकी प्रशंसा की जाती हैI स्वभावत:, चतुर्मुख के कारण, वेदांग और वेदांत में प्रभुत्व, कोई आश्चर्य नहीं कि उनके पास असीमित ज्ञान हैI

इसके अतिरिक्त, उनके पत्नी उनकी पास है, जो ज्ञान की देवी हैI यहां तक ​​कि आळ्ळवार भी श्रीमान नारायण से विरासत में प्राप्त ज्ञान से भरे हुए ब्रह्मा कि प्रशंसा में गाते हैंI

हाँ ! उनकी महिमा सार्वभौमिक रूप से स्वीकार की गयी हैI अतः, यहां तक ​​कि जब देवताओं को संदेह या विपत्ति आती है,  वोह इन्ही के पास पहुँचते हैंI अब और तब देवता रुद्र से भी अपने कष्टों का सुधार करने के लिए संपर्क करते हैंI यह त्रिनेत्र भगवान् बदले में उन्हें ब्रह्मा के पास ही ले जाते हैI

ब्रह्मा  समस्याओं का हल अपने आप करते अगर वो उनके सत्ता कि परिधि में होता तोI अगर नहीं, वे उन्हें क्षीरसागर में शयन, श्रीमन नारायण के पास ले जाएंगेI

अतः, देवता शिव पर निर्भर होते हैं जो बदले में अपने पिता ब्रह्मा पर निर्भर हैंI ब्रह्मा जो अपने पिता श्रीमन नारायण – सर्वोच्च भगवान के कमल चरणों में आत्मसमर्पित/शरणागत हैंI

सर्वोच्च भगवान के प्रति प्रार्थना के माध्यम से, दिव्य अनुग्रह के कारण ब्रह्मा देवताओं को अपने विपत्ति से छुटकारा पाने में मदद करते हैI अतः, ब्रह्मा और उन्के धर्मोपदेश स्वर्ग लोकों में विशेष आनंद उठाते हैंI

देवता हमेशा ब्रह्मा को उनके ज्ञान शब्दों के लिए प्रशंसा करते है जो हमेशा सत्य होते है, जो उनके दिव्य धाम “सत्यलोक” को सार्थक करता है I

ब्रह्मा भी देवताओं के इस सत्कार का आनंद लेते हैंI

एक बार देवतओं के बीच में मतभेद उत्पन्न हुआI “स्त्रियों में सबसे उत्तम कौन है?” कोई संतोषजनक उत्तर नहीं आने के कारण, उन्होंने ब्रह्मा के फैसले की मांग कीI

ब्रह्मा हमेशा कि तरह देवताओं के इस सम्मान से प्रोत्साहित हुएI वो तत्क्षण जवाब जानते थे…

देवी सरस्वती और उनके सभी दासियों ने अपेक्षा किया कि वे उनका नाम बतायेंगेI ब्रह्मा भी अपनी पत्नी का नाम बोलना चाहते थेI परंतु वेदों में महारत हासिल करने के बाद, असत्य कैसे बोल सकते हैं?

वे सरस्वती को देखके मुस्कुराये और प्रश्न का उत्तर में बोले कि “श्री महालक्ष्मी – वही देवियों में महानतम और स्त्रियों में उत्तम हैं” I उन्होंने इस उत्तर के प्रभाव को सोचे बिना सत्य बोल दियाI उन्हें परिणाम का सामना अब करना पड़ाI

सरस्वती के नेत्र लाल हो गयेI क्रोध के साथ कांपते हुए, वे ब्रह्मा को ताक रही थीI उनकी आंखें आग उगल रहे थेI

उन्होंने अपनी दासियों को इशारा कियाI उन लोगों ने अनुमान लगाया कि उनकी रानी अपनी निवास बदलने वाली है और तैयारी शुरू कर दियाI क्या करे, न जानते हुये ब्रह्मा चारों दिशाओ में देखने लगेI सुविधा के लिए उनके पास हर दिशा के लिए एक मुख जो हैI

सरस्वती प्रस्थान के लिए तैयार थीI उन्होंने बस बोले कि “जा रही हूँ”, परंतु ये नहीं बोले कि कहाँ या क्यूँ I ब्रह्मा भी उनसे पूछने की हिम्मत नहीं कीI

विपत्ति के समय हम मानव अपने सिर खरोंचते हैंI अब, ब्रह्मा अपने कौन से सिर को खरोंच? वह कष्ट में पड़ गये, क्या करें समझ में नहीं आयाI

शब्दों की देवी ने अपने स्वामी को त्याग दियाI उन्होंने नदी के तट पर तपस्या प्रारम्भ किया जो उनके नाम से हैI ब्रह्मा को दुःख हुआ I परन्तु वे खुश थे कि उन्होंने सत्य बोला की धन की देवी हि स्त्रियों में महानतम हैंI

उनकी खुशी लंबे समय तक नहीं टिकी। बृहस्पति, देवतओं के गुरु और अन्य अपनी अलग समस्या लेके भ्रह्मा के पास पहुंचेI

समस्या क्या थी?

हमें जल्द ही पता चल जाएगा I

अडियेन श्रीदेवी रामानुज दासी

Source – https://srivaishnavagranthams.wordpress.com/2018/05/07/story-of-varadhas-emergence-1/

archived in https://srivaishnavagranthams.wordpress.com/

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