वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी ३

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी

<<भाग २

“ब्रुहती वाक् तस्याः पतिः – ब्रुहस्पति” – ब्रुहस्पति शब्द, शब्दकोश और वाणी के नियन्त्रक हैंI वह निपुण और विद्वानों में सबसे महान हैंI

कृष्ण भगवान श्री भगवत् गीता १०-२४ में कहते हैं ” पुरोदसाम् च मुख्यम् माम् विद्दि पार्त ब्रुहस्पतिम्” – मै पुरोहितों (शिक्षकों) में ब्रुहस्पति हूँI

पुरोहित का मतलब है कि जो हमारे मन में रुचि रखता हो और अपने प्रयासों से भी पहले हमारे हित के लिए कार्य करता हैI

सचमुच! ब्रुहस्पति देवताओं की भलाई के लिए जाल बिछाते हैI

वह यही है जो देवताओं, ऋषिओं और मुनियों को सत्यलोक लेके आयेI

ब्रह्मा को अपने अनुचर के माध्यम से पता हुआ कि वे लोग एक समस्या लाये हैं जिसका सम्माधान निकालना हैI

कुछ यज्ञों में, शास्रविधि से पशु बलि अर्पण की मांग करता हैI शास्त्रों के अनुसार भेड़, बकरी और घोडा का यज्ञ में अर्पण करने की विधि हैI इस उद्देश्य के लिए लाये गए पशु को “याग पशू” कहते हैंI

उदाहरण के लिए, कल्प सूत्रों के अनुसार तपस्यायें जैसे चतुष्टोमम, उक्थ्यम, अधिरथ्रम यह तीन महत्वपूर्ण दिनों में निर्धारित रीती के अनुसार अश्वमेध याग में किया जाता हैI

इसके अतिरिक्त और भी कई जैसे “ज्योतिष्टोमम” का निर्वाहन किया जाता हैI

अनुष्ठान के समय में घोड़े के भीतरी अंगों को अग्नि को आहुती दिया जाना चाहिएI

इस समय समस्या यह है कि…..

ऋषि गण अपना अधिकार प्रतिपादित किया है कि ऐसे यज्ञों के समय में यथार्थ पशु कि आहुति आवश्यक नहीं हैI उस के स्थान में पिष्ट पशु (आटे से बना हुवा मुर्ती) का अर्पण किया जा सकता हैI वह पर्याप्त होगाI

देव गणों ने गंभीर रूप से इसका विरोध किया और दृढ़ता से निर्देशित किया कि केवल मांस और रक्त के जानवरों का हि उपयोग किया जाना चाहिएI यह समस्या का कारण हैI

वास्तव में अब, इस समस्या का समाधान प्रदान करना भ्रह्मा के सिर (सिरों) पे आ गिराI देवतओं के पुरोहित, बृहस्पति क्रोध में लाल होकर इन्साफ के लिए आये हैI

उनका इस रूप से ब्रह्मा भय से कंपित हो गयेI

ब्रह्मा गंभीर विचार करने लगे कि “शब्दों और विद्या कि देवी सरस्वती क्रोध में बाहर प्रस्थान कर दियाI और अब बृहस्पति, देवी सरस्वती का पुरुष प्रतिरूप ने प्रचण्ड क्रोध में प्रवेश कियाI”

ब्रह्मा ने असहाय भाव से संघर्ष मेहसूस किया, जैसे साधारण मानव जिनकि पत्नी और माता एक हि समय में नाराज़गी और रोष व्यक्त करने के भातिI

परंतु, जब ब्रह्मा ने ऋषि और मुनि गणों कि तरफ देखा तो बृहस्पति का क्रोध सहनीय प्रस्तुत हुआI क्योंकि वे अधिक क्रोधित थेI

यथार्थ पशु या पिष्ट पशु? अजन (ब्रह्मा) निर्णय क्या करे न जानते हुए शक्तिहीन हो गयेI

यह निर्णय प्रतीत हुवा कि देव गण उनके हि कुटुंब के है अतः बृहस्पति को बाद में विश्वास दिलायेंगेI उन्होंने निर्णय पिष्ट पशु के हित में दिया – पिष्ट पशु का बाली अर्पण में उपयोग किया जासकता हैI

ऋषि और मुनि गणों ने उत्तेजना में गर्जन किया; और उन्होंने देवतओं से उत्तम अनुभूत किया (“नावलिट्टुज़्हि तरुगिन्ऱोम्” “देवर् तम्” “तलैगल् मीदे”)

इस बीच, देव गणों ने ब्रह्मा के प्रतिशोध में शाप देने के लिए एक सभा बुलाई!!

क्या शाप?

अडियेन श्रीदेवी रामानुज दासी

Source – https://srivaishnavagranthams.wordpress.com/2018/05/12/story-of-varadhas-emergence-3/

archived in https://srivaishnavagranthams.wordpress.com/

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