वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी ६

श्रीः श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः

वरदराज भगवान् आविर्भाव कि कहानी

<< भाग ५

“सेतुर् यग्ये सकल जगताम् एक सेतुः स देव ॥”

निर्विवाद रूप से प्रसिद्ध तोण्डै प्रान्त की भव्यता (चेन्नई/कांचीपुरम प्रान्त)……

ब्रह्माण्ड पुराण वरदराज भगवान (पेररुळाळन्) की श्रेष्ठता और बुलंद तिरु हस्ति पर्वत की प्रतिष्ठा प्रकट करता हैI

उस पुराण में, हस्तिगिरी महात्म्य के अंतर्गत, नारद और ब्रुगु मुनियों के बीच संवाद प्रतीत होता है।

ब्रुगु मुनि के निवेदन से नारद ने सत्य व्रत क्षेत्र महात्म्य का वर्णन कियाI नारद ने यह ज्ञान ब्रह्मा से पाया थाI

यह प्रदेश जिसका नाम “तुण्डीर मण्डल” या “तोण्डै मण्डल” पृथ्वी पर शेष स्थानों की तुलना में अधिक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित है। !

यह यहां स्थित है सत्य व्रत क्षेत्रI और इसी कारण से अशरीरी ने ब्रह्मा को इस प्रान्त में जाने के लिए आदेश दियाI सभी हित कर्म (व्रत) जिन्हें हम निष्पादित करना चाहते हैं, यहां प्रराम्ब किए जाने पर बिना किसी अवरोध के सफलता पूर्वक संपूर्ण होंगेI अतः यह क्षेत्र, सत्य व्रत क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध हैI

यह शहर विशेष आकार जैसे मां पृथ्वी (भूदेवी) के “ओट्टियाणम्” (कमर पर पहने जाना वाला एक आभूषण) के जैसे हैI वास्तव में केवल इस स्तल को हि कांची के रूप में सराहना की गयी है (संस्कृत में कांची का अर्थ यह आभरण है)I कवियों ने स्त्री का वर्णन करते हुए, साधारणतः उनके कमर की प्रशंसा में गाते हैं। इसी तरह, पृथ्वी की सुंदरता उसके कमर के कारण है और वह आभूषण कांची है।

एक साधारण व्यक्ति भी लोकोक्ति से इस शहर की महिमा को समझ जाएगा कि “अगर कांची में जन्म लिया या काशी में निधन हुआ तो हमें मुक्ति प्राप्त होगा” I

मुक्ति प्रदान करने वाले शहर है अयोध्या, मथुरा (उत्तर में), हरिद्वार, काशी, कांची, उज्जैन और द्वारकाI दक्षिण में एक मात्र कांची हैI

इस सूची में उपस्थित है, हमें कांची की इस प्रशंसनीय स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।

कांची कि अद्वितीयता यह है कि वह एक मात्र मुक्ति प्रदान क्षेत्र/पवित्र शहर है जो पृथ्वी की कमर आभूषण की तुलना में आती हैI

इसके अलावा, यह स्वयंम व्यक्त क्षत्रों में से एक है, कांची को यह और एक गौरव है I स्वयंम व्यक्त क्षत्र के विषय में, दया सतकम प्रकट करता है कि ” स्वयमुधयिन…” अर्थात, भगवान इस स्थान पर अपनी ही मधुर संकल्प पर उतरते हैं, कोई प्रार्थना से प्रेरित होके नहीं I

यह पवित्र तपस्या सफल होने के लिए, अशरीरि आज्ञा देते है ब्रह्मा को ,जो भारत देश पहुचे है, वह “सत्य व्रत क्षेत्र” कि और प्रस्थान करेI उन्होंने भी तुरंत अपनी यात्रा प्रारम्भ कीI कमलोत्पलन् (कमल में से जन्में हुए., ब्रह्मा) उत्साही और आनंदमय हो गये जैसे कि याग संपन्न हो गया हो और उसी पल में भगवान के दर्शन हुआ होI

वेदांत देशिकन ने एक अलौकिक रचना “हम्स सन्देश” किया I इस अद्भुत कथा में वर्णित किया गया है कि कैसे सीता वियोग से पीड़ित राम एक हंस को सीता के पास दूत के रूप में भेजते हैंI उन्होंने कौनसे स्तलों का दर्शन करना है और मार्ग के बारे में हंस को विस्तृत निर्देश दियाI “और ध्यान पूर्वक देखना”, उन्होंने हंस से आग्रह किया कि वे मार्ग में तोंडै मण्डल का दर्शन करना न भूले।

वो प्रशंसा करते हैं

“तुन्डेईर् आख्यम् तदनु महितम् मण्डलम् वीक्शमाणः क्षेट्न्रम् यायाः
क्शपित दुरितम् तत्र सत्य व्रताक्यम्!!”

– कि यह पवित्र स्थल सत्य व्रत क्षेत्र हमारे कुकर्मो को शीघ्र पदच्युत कर देगा I

हम्स सन्देश आगे इस शहर की महिमा और प्रशंसा करते हुए कहता है कि कांची एक मात्र जगह है जो निरंतर भगवान की दयालु कृपा और आनंद का पात्र बना हैI

अपनी स्वयं की अननुकरणीय अद्वितीय शैली में “कवितार्किक सिम्हम”  देशिकन और एक    दिलचस्प अंश प्रदान करते है I हंस को सीता कि खोज में लंबी दूरी तय करना था और इस लिए थक सकता था। पसीने और अन्य असुविधाओं के कारण इसके दुःख बड सकते है। लेकिन हंस को भय होने की कोई आवश्यकता नहीं है। कंची की मंद पवन सुलभता से अपनी थकावट दूर कर देगी।

“मंदाद्भुतात तधनु महितो निस्स्रुत्च चुताशंदाथ पार्श्वे तस्या” पशुपतिशिरच चन्द्र निहारा वाही I  दुरात प्राप्तम प्रियासखमिव त्वां उपैष्यति अवश्यं कम्पापाध: कमल वनिक कामुको गंधवाहा: II”

हे हंस, कांची में बहुत से आम उपवन हैं। बहने वाली हवाएं पेड़ों को हिलाएगा। मीठी सुगंध (फल, पत्ते और पुष्पों के कारण) हवा ले जाएगा। यह शहर की तरफ बह कर प्रजा को प्रसन्न और आनन्दित करेगा।

इतना ही नहीं, पवन अपनी शीतलता को समृद्ध करने के लिए एक चाल को अपनाएगी। आम के बगीचे से शहर कि तरफ रास्ते में यह शिव के शीर्ष (एकाम्बन) से होते हुए कृपा बरसायेगा, जिनका यह मंदिर में निवासस्थान है।

यह स्वाभाविक है हमें संदेह आयेगा कि….हवा शिव के शीर्ष को दुलारेगा तो शीतलता कैसे प्राप्त करेगा?

चन्द्रमाँ शिव के शीर्ष को आभूषित करता है I चंद्रा (चाँद) और शीतलता दोनों समानार्थक है I अतः शशि को दुलारने से, पवन और भी शीतल हो जायेगा I

इसके अलावा इस में कमल के जंगल का आलिंगन के नतीजे के रूप में कमल की सुगंध होगी I अतः, कांची से हवा एक प्रिय मित्र की तरह आपका स्वागत करेगा (जैसा एक मित्र आपका मनोरंजन करता हो)I

इस कारण, भय को दूर करो I ऐसे राम हंस से कहते है – देशिकन ने विवरण दिया I

वर्तमान में (श्रृंखला लिखने के समय) तीव्र ग्रीष्मकाल भय भीत कर रही है I वरुण देव की दया कि प्रतीक्षा दिलासा दे रही है I

(अन्द वरुणनै वेन्डुम्बोतु इन्द वरुणनै आऱुतल् अलिक्कुम्)

इस प्रकार सर्वशक्तिमान राम स्वयं ने कई तरीकों से इस शहर की सराहना की और महिमा की है। फिर, क्या ब्रह्मा आनंद से उस स्तान कि ओर प्रस्तान करने में संकोच क्यों होंगे?

मन में प्रसन्नता से, ब्रह्मा फुर्ती के साथ कांची शहर पहुंचे जो पृथ्वी के लिए एक आभूषण के रूप में जगमगाता है I

अयन (ब्रह्मा) अथ्थिगिरी का परिकल्पना किया, जिन पर भगवान कि कृपा थी, वरद राज भगवान यह शहर को सुशोभित करने से पूर्व I

ब्रह्मा अचंभित हुए कि क्या भगवान का चक्रायुद (भगवान के पांच दिव्य आयुधों में से एक) को अथ्थिगिरि के रूप में परिवर्तित किया गया हो I चक्र शत्रु को विध्वंस करता है I इसी तरह, यह पर्वत (अथ्थिगिरि) हमारे सभी पापों को बिना किसी अवशेष छोडे विनाश कर देगा ।

यह पर्वत उनके (वासुदेव) मन के बहुत करीब था I इस कारण, नाभिजन्मन (नाभि से जन्मे, अर्थात ब्रह्मा) अपने मन को पूर्णतः भगवान पर ध्यान केंद्रित करके यह पर्वत की आराधना करना प्रारंभ किया।

वह तुरंत यज्ञ के लिए स्वयं को और शहर को सन्नद्ध करना चाहते थे I शीघ्रता में, उनके मुंह ने एक नाम निकला – विश्वकर्मा।

ब्रह्मा के साथ साथ, हम भी उनकी आगमन का प्रतीक्षा करेंगे I

***************************************************************************

यह सामान्य ज्ञान है कि दीपक कि आग के प्रलोभन से जुगुनू की उसी अग्नि में उसकी मृत्यु  होति है। लेकिन क्या कोई दीपक को दोषी ठहराएगा? वास्तविक जीवन में भी कई मूर्ख होते हैं जिन्हें दीपक द्वारा खींची गई कीड़ों से तुलना की जा सकती है, जो मृत्यु से मिलने के लिए पूर्वनिर्दिष्ट होते हैं।

अगले प्रकरण में आ रहा है ..

***************************************************************************

अडियेन श्रीदेवी रामानुज दासी

Source – https://srivaishnavagranthams.wordpress.com/2018/05/15/story-of-varadhas-emergence-6/

archived in https://srivaishnavagranthams.wordpress.com/

pramEyam (goal) – http://koyil.org
pramANam (scriptures) – http://granthams.koyil.org
pramAthA (preceptors) – https://guruparamparai.wordpress.com
SrIvaishNava Education/Kids Portal – http://pillai.koyil.org

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s